Thursday, 7 February 2013

एकतरफ़ा प्यार की छोटी सी कहानी इन पंक्तियों में पेश है...
 
तेरे मेरे दरमियाँ आशिकी कभी आई ही नहीं,

फिर भी खुदा से यारो हमको, शिकायत हाँ जरा भी नहीं।



तेरे मेरे दरमियाँ आशिकी कभी आई ही नहीं,



...
हम साथ होते हैं हर सुबह, हम साथ होते हैं हर शाम,
भले न हो अपना हाथो में हाथ, पर संग में बिताते हैं लम्हे तमाम

अब अगर कोई कह दे , तेरी आदत न रखना
अब अगर कोई कह दे , तेरी आदत न रखना



इस बात की ....गुंजाईश नहीं



तेरे मेरे दरमियाँ आशिकी कभी आई ही नहीं,
फिर  खुदा  से यारो हमको, शिकायत हाँ जरा भी नहीं।





बरसो तलक तुझसे है बाँटी खुशियाँ, सालो से हैं तेरे गम में शरीक

रहे हम हमेशा तेरे आस पास , पर आ सके हम न तेरे करीब

अब अगर तू ही कह दे, आगे भी न है मुमकिन

अब अगर तू ही कह दे, आगे भी न है मुमकिन


समझेंगे खुदा की इनायत नहीं ...



फिर खुदा से यारो हमको, शिकायत हाँ जरा भी नहीं।

तेरे मेरे दरमियाँ आशिकी कभी आई ही नहीं,



.....सचिन्द्र कुमार

पिछले दिनों मैंने कुछ हास्य कविता के रूप में लिखने की कोशिश करी थी, एक सवाल आया तब मन  में और कुछ सोचा तो जवाब भी खुद निकल आया। उसी सवाल जवाब कुछ पंक्तियाँ  हाज़िर हैं 

जाने कवी लोगो की बीवी और नेताओ से क्या जमती है

की आधे से ज्यादा हास्य कविताएं इन दोनों पर ही बनती है


थोड़ी सी नेताओ की बुराई कर डालो

कुछ कमी रह जाए तो बीवियों की आदत निचौड़ डालो

मजे दिलाओ श्रोताओ को इनके तौर तरीकों के

थोडा लगा दो तड़का पतियों के फूटे नसीबो के।

बात है सच लोगो के मन को, ऐसी ही बाते रमती है

शायद इसीलिए हास्य कविताये, इन दोनों पर ही बनती है


कोई बात नहीं है ऐसी जो इन दोनों में एक हो

बीवी एक ही काफी है ..नेता भले अनेक हो

एकलौती बीवी ही अपनी हमको, नाको चने चबवाती है

और नेताओ की टोली दोस्तों मिल के नोट लुटाती है

बात मजे की ऐसी है की यही हास्य कवियों की टोली

अपने लिए एक बीवी और कई नेताओ को चुनती है


शायद इसीलिए हास्य कविताये इन दोनों पर ही बनती है


.....सचिन्द्र कुमार

Monday, 31 December 2012

आप जानते हैं कौन

*नयी दिल्ली में 16 दिसम्बर,2012 को हुए रेप और हत्याकांड पर।

बहुत समय बीत गया है,

बहुत कुछ बीत गया है,

कई लोगो पर जुल्म हुए

जिन्हें कुछ करना था वो चुप रहे

जो बोले उन्हें चुप कराया गया

सब कुछ ठीक होगा अब से

इस झूठ को दोहराया गया

इस बार हो गयी गलती हमसे

माफ़ करे .. न होगा अगली बार

उम्मीद के साथ भारत के "आप जानते हैं कौन"


 

Saturday, 28 July 2012

...छंटनी...

...छंटनी...



अभी अभी दफ्तर पहुंचे हैं

माहौल में कुछ गर्मी सी है

ताकते हुए एक दुसरे को हम सब

किसी जवाब की तलाश में हैं

तभी एक काबिल दोस्त की गैरमौजूदगी ने

शायद समझा दिया सभी को


पिछले महीने की छंटनी के नतीजे आये हैं आज!






...सचिन्द्र कुमार

Saturday, 14 July 2012

....मैं और मेरा स्कूटर...

मैं और मेरा स्कूटर
चालीस की रफ़्तार पर
निकल पड़े हैं कैमरा लिए
गीली सी सड़क पर

कभी मैं इसको कहीं ले जाता,
कभी ये हेंडल मुझे नचाता
तस्वीरो को लेने रुकते हम
हर राह नयी... हर नयी डगर..

मानसून भी आसमान से
कह रहा देखो साथ हूँ मैं भी .
बरसात लिए चला  जो संग वो
रंगीन हो गया और  सफ़र..

मैं और मेरा स्कूटर
चालीस की रफ़्तार पर
निकल पड़े हैं कैमरा लिए
गीली सी सड़क पर

...सचिन्द्र कुमार...

Thursday, 5 July 2012

तेरे जाने पर - भाग ४

पहले पढ़े : तेरे जाने पर- भाग 3

लौट रहा था मिलकर तुमसे..
शायद तुमने ही बोला होगा,
इसलिए .. रास्तो ने छेड़ी है..
फिर से कब आने वाली बात..

एक ख्वाब लिए निकला था*
एक ख्वाब लिए हूँ वापस आया,
अच्छा है..या यार बुरा है..
समझ अभी तक नहीं हूँ पाया
हमने ना जाने कितनी बार, ये देखा है हर रात,

हर बार मेरे हाथो में..है आया तेरा हाथ,
हर बार है छूटा मेरे..हाथो से तेरा हाथ.

...सचिन्द्र कुमार

Sunday, 1 July 2012

तेरे जाने पर- भाग 3


पिछली पोस्ट :- तेरे जाने पर - भाग 2    




एक सुकून की लहर सी है
उम्मीद है जो सोचा है... वैसा ही हो..

पूरे सप्ताह था हमें इंतज़ार ..
मिलना जो तय था अब के शुक्रवार..

हमने दुआएं मांगी है की कुछ ऐसा हो..
अब के जो हो तो.. ना मिलना पल दो पल का हो ..

एक ख्वाब लिए चलता हूँ उस तरफ, के मिलने के बाद..

जो हाल कल तक इधर था ..
वो हाल कल से उधर हो..

सचिन्द्र कुमार..